तलाक़
आपसी सहमति — हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13B (सिविल विवाह के लिए विशेष विवाह अधिनियम की धारा 28) के तहत पक्षों का कम से कम एक साल अलग रहना और सभी शर्तों पर सहमत होना ज़रूरी है: गुज़ारा-भत्ता, स्त्रीधन, कस्टडी, मुलाक़ात और मुक़दमों की वापसी। पहला मोशन संयुक्त रूप से दाख़िल होता है; दूसरा मोशन छह महीने की कूलिंग-ऑफ़ अवधि के बाद, जिसे अदालत अमरदीप सिंह बनाम हरवीन कौर (2017) के अनुसार माफ़ कर सकती है जहाँ पक्ष पहले से लंबे समय से अलग हैं और सुलह की कोई संभावना नहीं। सही ड्राफ़्ट किया गया समझौता विलेख बाद के विवादों से बचाता है।
विवादित तलाक़ — धारा 13 HMA के आधारों पर: क्रूरता (शारीरिक या मानसिक), दो साल का परित्याग, व्यभिचार, धर्म-परिवर्तन, मानसिक अस्वस्थता, आदि। क्रूरता सबसे आम आधार है और विशिष्ट घटनाओं, पत्राचार, शिकायतों और गवाहों से साबित होती है। धारा 13(2) के तहत पत्नी के अतिरिक्त आधार, धारा 10 के तहत न्यायिक पृथक्करण और धारा 9 के तहत दांपत्य अधिकारों की बहाली भी संभाली जाती है। ईसाई, मुस्लिम और पारसी व्यक्तिगत क़ानूनों और विशेष विवाह अधिनियम के अपने आधार और प्रक्रियाएँ हैं।
भरण-पोषण और गुज़ारा-भत्ता
- धारा 144 BNSS (पहले धारा 125 CrPC) — पत्नी, बच्चों और माता-पिता के लिए भरण-पोषण जो स्वयं का भरण-पोषण नहीं कर सकते; मजिस्ट्रेट या फ़ैमिली कोर्ट द्वारा, अर्ज़ी की तारीख़ से अंतरिम भरण-पोषण सहित। सुप्रीम कोर्ट के रजनेश बनाम नेहा (2020) के निर्देशों के अनुसार दोनों पक्षों को संपत्ति और आय का शपथपत्र दाख़िल करना होता है — यह अब हर भरण-पोषण मामले की रीढ़ है।
- धारा 24 HMA — वैवाहिक मुक़दमे के दौरान अंतरिम भरण-पोषण और मुक़दमे का ख़र्च; धारा 25 — डिक्री के समय स्थायी गुज़ारा-भत्ता, एकमुश्त या मासिक।
- घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 20 — मौद्रिक राहत, जिसमें आय की हानि, चिकित्सा ख़र्च और भरण-पोषण शामिल हैं।
- हिन्दू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम की धारा 18 — पत्नी का स्वतंत्र भरण-पोषण अधिकार।
चैंबर आय और संपत्ति का शपथपत्र सावधानी से तैयार करता है — यही वह दस्तावेज़ है जिस पर अदालत भरोसा करती है — और दूसरी ओर, आय या ज़रूरत के बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों की परख करता है।
कस्टडी और मुलाक़ात
कस्टडी बच्चे के कल्याण पर तय होती है, माता-पिता के अधिकारों पर नहीं। याचिकाएँ Guardians and Wards Act, 1890 (और वैवाहिक मुक़दमे के भीतर धारा 26 HMA) के तहत फ़ैमिली कोर्ट में दाख़िल होती हैं। अंतरिम कस्टडी, मुलाक़ात का कार्यक्रम, रात और छुट्टियों की व्यवस्था, और बच्चे को दिल्ली या भारत से बाहर ले जाने पर रोक — ये सामान्य अंतरिम राहतें हैं; दिल्ली की अदालतें पेरेंटिंग प्लान तक पहुँचने के लिए मध्यस्थता और बाल-परामर्शदाता की रिपोर्ट का बढ़ता उपयोग करती हैं।
वैवाहिक घर और स्त्रीधन
साझा घर में रहने का पत्नी का अधिकार घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत सुरक्षित है; स्त्रीधन (पत्नी के गहने, उपहार और वस्तुएँ) की वापसी DV Act के तहत और आपराधिक न्यासभंग के रूप में माँगी जा सकती है। जहाँ दावा निराधार हो, वहाँ पति या उसके माता-पिता की अपनी संपत्ति पर स्वामित्व का बचाव किया जाता है।
समझौता और मध्यस्थता
दिल्ली में अधिकांश वैवाहिक विवाद दिल्ली मध्यस्थता केंद्रों या फ़ैमिली कोर्ट के परामर्शदाताओं को भेजे जाते हैं। एक पूर्ण समझौते में आम तौर पर आपसी सहमति से तलाक़, एकमुश्त गुज़ारा-भत्ता, कस्टडी और मुलाक़ात, सभी मुक़दमों की वापसी और किसी भी FIR की क्वैशिंग शामिल होती है — इस तरह ड्राफ़्ट किया हुआ कि शर्तें लागू कराई जा सकें।
दिल्ली में व्यवहार
फ़ैमिली कोर्ट दिल्ली के सभी छह ज़िला अदालत परिसरों में हैं। याचिका वहाँ दाख़िल होती है जहाँ विवाह हुआ, जहाँ पक्ष अंतिम बार साथ रहे, या जहाँ पत्नी रह रही है। फ़ैमिली कोर्ट की डिक्री से अपील Family Courts Act की धारा 19 के तहत दिल्ली हाई कोर्ट में होती है।
कौन से दस्तावेज़ तैयार रखें
- विवाह प्रमाणपत्र, निमंत्रण पत्र या फ़ोटो
- अलग रहने का प्रमाण और उसकी तारीख़
- दोनों पति-पत्नी के आय दस्तावेज़ — सैलरी स्लिप, ITR, बैंक स्टेटमेंट, संपत्ति के काग़ज़
- बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल रिकॉर्ड
- कोई शिकायत, FIR, DV Act याचिका या पहले पारित आदेश
- जिन आधारों पर भरोसा किया जा रहा है उनसे संबंधित मैसेज, ईमेल और अन्य सामग्री
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दिल्ली में आपसी सहमति से तलाक़ में कितना समय लगता है?
अगर छह महीने की कूलिंग-ऑफ़ अवधि माफ़ हो जाए, तो पहले मोशन के कुछ हफ़्तों में डिक्री मिल सकती है; वरना दूसरा मोशन छह महीने बाद दाख़िल होता है और डिक्री पहली फ़ाइलिंग के लगभग सात-आठ महीने में मिलती है, सूचीबद्ध होने के अधीन।
क्या कामकाजी पत्नी भी भरण-पोषण माँग सकती है?
हाँ, अगर उसकी आय वैवाहिक घर में उसके जीवन-स्तर के लिए अपर्याप्त है; अदालत शपथपत्रों के आधार पर दोनों पक्षों की आय और ज़रूरतों की तुलना करती है।
छोटे बच्चे की कस्टडी किसे मिलती है?
बच्चे का कल्याण निर्णायक है; बहुत छोटे बच्चों के लिए आम तौर पर माँ को वरीयता मिलती है, लेकिन पिता की मुलाक़ात और भागीदारी सुरक्षित रहती है, और व्यवस्था बच्चे की उम्र और परिस्थितियों के साथ बदलती है।
क्या विवाह के एक साल के भीतर तलाक़ की याचिका दाख़िल हो सकती है?
आम तौर पर नहीं, धारा 14 HMA के तहत — असाधारण कठिनाई या भ्रष्टता के मामलों में अदालत की अनुमति से ही। अन्य उपाय — भरण-पोषण, DV Act की राहत, न्यायिक पृथक्करण — उपलब्ध रहते हैं।
अगर दूसरा पक्ष समझौते से मुकर जाए तो शर्तें कैसे लागू होंगी?
अदालत में दर्ज और डिक्री में शामिल समझौता निष्पादन (execution) के ज़रिए लागू होता है; आपसी सहमति के तलाक़ में दूसरे मोशन से पहले सहमति वापस लेना संभव है, इसीलिए समझौते में सुरक्षा उपाय रखे जाते हैं।
इस मामले में बात करनी है?
कॉल या WhatsApp करें, या संक्षिप्त विवरण ऑनलाइन भेजें। परामर्श चैंबर में या वीडियो पर — दस्तावेज़ों के साथ।