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Bar Council of Delhi · D/2658/2015 English
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डॉ. सौरभ कपूर

अधिवक्ता, बार काउंसिल ऑफ़ दिल्ली (D/2658/2015)। 2015 से सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया, दिल्ली हाई कोर्ट, दिल्ली की ज़िला अदालतों, DRT और NCLT में प्रैक्टिस।

पेशेवर पृष्ठभूमि

डॉ. सौरभ कपूर 2015 में बार काउंसिल ऑफ़ दिल्ली में अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए (नामांकन संख्या D/2658/2015) और तब से लगातार दिल्ली में मुक़दमेबाज़ी की प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनका काम दो हिस्सों में बँटा है।

क्रिमिनल डेस्क — ज़मानत और अग्रिम ज़मानत, दिल्ली हाई कोर्ट में FIR और शिकायत मामलों की क्वैशिंग, सेशन और मजिस्ट्रेट अदालतों में ट्रायल में बचाव, चेक बाउंस (धारा 138 NI Act) के मुक़दमे, 498A और दहेज के मामले, साइबर और आर्थिक अपराध, और क्रिमिनल अपील व रिवीज़न। क्रिमिनोलॉजी में उनका शोध जाँच के रिकॉर्ड, गवाहों की गवाही और सज़ा पर बहस को गहराई देता है।

सिविल, बैंकिंग और कमर्शियल डेस्क — SARFAESI और DRT की कार्यवाही में कर्ज़दारों, गारंटरों और बैंकों का प्रतिनिधित्व; NCLT और NCLAT में IBC के मामले (धारा 95 के तहत पर्सनल गारंटर की कार्यवाही सहित); शेयरधारक और व्यावसायिक विवाद; आर्बिट्रेशन से जुड़ी अदालती कार्यवाही; और प्रॉपर्टी, किरायेदारी व उपभोक्ता मुक़दमे।

योग्यताएँ

योग्यता विवरण
LL.B. विधि स्नातक
LL.M. विधि में स्नातकोत्तर
Ph.D. क्रिमिनोलॉजी में डॉक्टरेट
नामांकन बार काउंसिल ऑफ़ दिल्ली, D/2658/2015 (2015)
भाषाएँ हिन्दी, अंग्रेज़ी

अदालतें और ट्रिब्यूनल

  • सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया — SLP, क्रिमिनल अपील, ट्रांसफ़र पिटीशन और रिट (सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार फ़ाइलिंग Advocate-on-Record के माध्यम से)
  • दिल्ली हाई कोर्ट — ज़मानत, क्वैशिंग, क्रिमिनल अपील व रिवीज़न, अनुच्छेद 226/227 की रिट, कमर्शियल और आर्बिट्रेशन मामले
  • दिल्ली की ज़िला अदालतें — तीस हज़ारी, साकेत, पटियाला हाउस, कड़कड़डूमा, रोहिणी और द्वारका (सेशन, मजिस्ट्रेट, सिविल और फ़ैमिली कोर्ट)
  • Debts Recovery Tribunals (DRT-I, II, III दिल्ली) और DRAT
  • NCLT और NCLAT, नई दिल्ली
  • ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग

चैंबर कैसे काम करता है

हर मामला परामर्श से शुरू होता है — चैंबर में या वीडियो पर, दस्तावेज़ों के साथ। उस बैठक से आप यह जानकर निकलते हैं कि कानूनी स्थिति क्या है, विकल्प क्या हैं, कितना समय लग सकता है, और उस काम की फ़ीस क्या होगी — जो कुछ भी फ़ाइल होने से पहले लिखित में तय होती है। केस के दौरान हर सुनवाई के बाद आपको अपडेट मिलता है, और आपकी बात हमेशा उसी अधिवक्ता से होती है जो आपका मामला देख रहा है।

पेशेवर सूचना

यह वेबसाइट बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के नियम 36 के अनुसार प्रकाशित की गई है और इसमें केवल वही जानकारी है जो एक अधिवक्ता प्रकाशित कर सकता है — नाम, संपर्क, नामांकन, योग्यताएँ और प्रैक्टिस के क्षेत्र। इसमें किसी क्लाइंट का नाम, नतीजा या प्रशंसापत्र नहीं है, और यह काम की याचना नहीं है।